Updated – Nov 7, 2026
Quick Summary (त्वरित उत्तर)
कार में AC चलाने से माइलेज औसतन 10% से 20% तक कम होता है। ट्रैफिक वाली सिटी ड्राइविंग में छोटी हैचबैक में यह गिरावट 25% तक पहुँच सकती है, जबकि हाईवे पर यह आमतौर पर 5% से 12% रहती है।
| कार का प्रकार (Engine Type) | सिटी में माइलेज ड्रॉप (%) | हाईवे पर माइलेज ड्रॉप (%) |
|---|---|---|
| Small Petrol Hatchback (800-1000cc) | 15% – 25% | 6% – 12% |
| Mid-size SUV (1.5L Petrol) | 10% – 18% | 5% – 10% |
| Diesel Engine (Hatchback/Sedan/SUV) | 8% – 15% | 4% – 8% |
| CNG Cars | 12% – 20% | 6% – 12% |
नोट: ये ranges गर्मी (35°C+), ट्रैफिक और ड्राइविंग स्टाइल के हिसाब से बदलती हैं। ये अनुमान हैं, किसी एक कार का ARAI आंकड़ा नहीं।
कार का AC कैसे काम करता है और इंजन पर कितना लोड डालता है? (The Technical Science Simplified)

ज्यादातर लोग यह गलती करते हैं कि AC को सिर्फ एक बटन समझ लेते हैं। असल में यह इंजन से सीधे जुड़ी हुई एक मैकेनिकल मशीन है, जो आपके पेट्रोल या डीजल से चलती है।
AC Compressor: इंजन का सबसे बड़ा “एक्स्ट्रा पैसेंजर”
AC का दिल है AC Compressor। यह एक belt के जरिए इंजन के crankshaft से जुड़ा रहता है। जैसे ही आप AC ऑन करते हैं, compressor का magnetic clutch लॉक हो जाता है और compressor घूमने लगता है।
मतलब इंजन की जो power पहले पूरी तरह पहियों तक जाती थी, उसका एक हिस्सा अब refrigerant को compress करने में खर्च होने लगता है। यही हिस्सा आपकी टंकी से अतिरिक्त फ्यूल खींचता है।
कूलिंग की पूरी chain, 4 स्टेप में
- Compression: Compressor refrigerant गैस को high pressure पर दबाता है, जिससे गैस बहुत गर्म हो जाती है।
- Condensation: रेडिएटर के आगे लगा Condenser गर्मी बाहर फेंकता है और गैस liquid बन जाती है।
- Expansion: Expansion Valve से गुजरते ही pressure गिरता है और refrigerant बेहद ठंडा हो जाता है।
- Evaporation: Dashboard के पीछे Evaporator से Blower की हवा गुजरती है और ठंडी होकर cabin में आती है।
सिर्फ compressor नहीं, तीन जगह से बढ़ता है Engine Load
- Compressor: सबसे बड़ा mechanical load, सीधे crankshaft से।
- Blower Motor और Radiator/Condenser Fan: ये electrical load हैं। Alternator को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, और Alternator भी इंजन से ही घूमता है।
- Idle RPM: खड़ी गाड़ी में AC ऑन होते ही ECU इंजन का RPM थोड़ा बढ़ा देता है, ताकि इंजन बंद न हो। इसमें भी फ्यूल लगता है।
छोटी कारों में असर ज्यादा क्यों दिखता है?
सिटी ट्रैफिक में इंजन पहले ही कम load पर चल रहा होता है। ऐसे में compressor का extra load उसके सामने बड़ा लगता है।
छोटे इंजन (800-1000cc) की कुल power कम होती है, इसलिए AC का प्रतिशत असर बड़ी SUV या बड़े डीजल इंजन के मुकाबले ज्यादा दिखता है। Automotive experts आमतौर पर यही समझाते हैं कि छोटी कार में AC “महसूस” ज्यादा होता है, भले रुपयों में फर्क कम हो।
Car Me AC Chalane Se Mileage Kitna Kam Hota Hai? (Real Data Breakdown)
सच यह है कि कोई एक fixed आंकड़ा नहीं है। AC का असर तीन चीज़ों पर टिका है: बाहर का तापमान, ट्रैफिक और इंजन का साइज़।
स्टडीज़ में फर्क भी बड़ा दिखता है। अमेरिकी सरकार की साइट fueleconomy.gov और AAA बताते हैं कि बहुत गर्म मौसम में, खासकर छोटे ट्रिप में, AC कार का fuel economy 25% से ज्यादा घटा सकता है।
दूसरी तरफ, 2019 की एक Transportation Research Record स्टडी में औसत गिरावट सिर्फ लगभग 2% (रेंज 1.3% से 7.5%) मिली। भारत की 35-45°C गर्मी और भारी ट्रैफिक आमतौर पर ऊपर वाले छोर के करीब बैठते हैं। इसी वजह से हमारा editorial अनुमान सिटी के लिए 10-20% का है।
1. सिटी ड्राइविंग (Bumper-to-Bumper Traffic)
यहां AC का असर सबसे ज्यादा दिखता है। कम speed पर इंजन हल्के load पर चलता है, पर compressor लगातार घूमता रहता है। ऊपर से stop-go में इंजन ज्यादातर idle के आसपास रहता है।
Autocar India ने Skoda Kylaq की real-world टेस्टिंग में ध्यान दिलाया कि 30-36°C के तापमान पर AC को ज्यादा मेहनत करनी पड़ी। उसका auto engine stop/start सिस्टम भी cabin का तापमान बनाए रखने के लिए इंजन को ज्यादा देर बंद नहीं रखता। यानी सिटी में फ्यूल बचाने वाला फीचर भी AC की वजह से कमजोर पड़ जाता है।
अनुमान: 10% से 20%, छोटी पेट्रोल हैचबैक में 25% तक।
2. Highway Cruise (80-100 km/h)
हाईवे पर इंजन पहले से ज्यादा load में होता है। Compressor का हिस्सा कुल power में अपेक्षाकृत छोटा रह जाता है, इसलिए प्रतिशत असर घट जाता है।
CarDekho के टेस्ट में Toyota Glanza (1.2L पेट्रोल) 100 km/h पर, AC 24°C और fan speed 2 के साथ चली। AC ऑफ पर उसने 23.47 kmpl दिया और AC ऑन पर 21.66 kmpl। यह करीब 7.7% की गिरावट है।
अनुमान: 5% से 12%।
3. Parked Car with AC ON (खड़ी गाड़ी में AC)
यहां सबसे बड़ा सच यह है कि गाड़ी एक किलोमीटर भी नहीं चल रही, फिर भी इंजन फ्यूल जला रहा है। यानी 0 km की कीमत पर पूरा फ्यूल सिर्फ AC पर खर्च होता है।
उसी स्टडी के हवाले से बताया जाता है कि idle पर AC ऑन होने से fuel consumption करीब 13% बढ़ जाता है। ज्यादातर छोटे पेट्रोल इंजन idle पर मोटे तौर पर आधा से एक लीटर प्रति घंटा पीते हैं (अनुमान)। 15 मिनट AC चलाकर खड़े रहने का मतलब कुछ सौ मिलीलीटर फ्यूल, जो रोज होने पर महीने में जुड़ जाता है।
ARAI Testing का सच: ब्रोशर वाला माइलेज AC के बिना क्यों होता है
ARAI के लैब टेस्ट में AC बंद रखा जाता है, और टेस्ट नियंत्रित हालात में होता है, असली ट्रैफिक, गड्ढों और सिग्नल के बीच नहीं। इसीलिए रोज के इस्तेमाल में माइलेज ब्रोशर से कम निकलता है।
सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) ने इसी खामी को देखते हुए draft notification में प्रस्ताव रखा कि 1 अक्टूबर 2026 से बनने या आयात होने वाली कारों के AC-on और AC-off दोनों mileage figures बताए जाएं।
City vs Highway: खिड़की खोलना बनाम AC चलाना (The Drag Force / Aerodynamics Truth)

“खिड़की खोल लो, पेट्रोल बचेगा” यह भारत का सबसे पॉपुलर मिथ है। यह आधा सच है: कम speed पर सही, ज्यादा speed पर बिल्कुल उल्टा।
Aerodynamic Drag क्या होता है?
जब गाड़ी हवा को चीरकर चलती है, तो हवा उसे पीछे खींचती है। इसे Aerodynamic Drag कहते हैं। खिड़कियां खुलते ही हवा cabin में भरती है और गाड़ी एक पैराशूट की तरह पीछे खिंचने लगती है।
खास बात यह है कि drag speed के वर्ग के हिसाब से बढ़ता है।
F_d = \tfrac{1}{2} \, \rho \, C_d \, A \, v^2
जब आपकी कार सड़क पर दौड़ती है, तो सामने की हवा उसे पीछे की तरफ धकेलती है—ठीक वैसे ही जैसे तेज आंधी में पैदल चलने पर आपको पीछे की ओर धक्का महसूस होता है। साइंस की भाषा में इसे एरोडायनामिक ड्रैग फोर्स (\(F_{d}\)) कहते हैं। इस फॉर्मूले का सीधा सा मतलब है कि गाड़ी जितनी बड़ी होगी (Frontal Area – \(A\)) और उसका डिजाइन जितना चौकोर होगा (Drag Coefficient – \(C_{d}\)), हवा उसे उतना ही ज्यादा रोकेगी।
लेकिन सबसे बड़ा रोल स्पीड (\(v^{2}\)) का है; जैसे ही आप हाईवे पर गाड़ी की रफ्तार दोगुनी करते हैं, हवा की यह रुकावट चार गुना बढ़ जाती है! यही वजह है कि जब इंजन को इस भारी-भरकम हवा की दीवार को चीरकर आगे बढ़ना पड़ता है, तो उसे ज्यादा ज़ोर लगाना पड़ता है और आपकी कार का माइलेज अचानक से गिर जाता है।
असली टेस्ट: Toyota Glanza, 81 km, 100 km/h
CarDekho ने एक ही रूट पर, एक ही speed पर तीन टेस्ट किए। नतीजे नीचे हैं (source)।
| Condition | फ्यूल खर्च (81 km) | Mileage (kmpl) |
|---|---|---|
| AC ON, खिड़कियां बंद | 3.74 L | 21.66 |
| AC OFF, खिड़कियां खुली | 3.80 L | 21.31 |
| AC OFF, खिड़कियां बंद | 3.45 L | 23.47 |
Source: CarDekho
हाईवे पर खिड़की खोलकर AC बंद करने से माइलेज AC ऑन वाली स्थिति से भी कम निकला। सबसे अच्छा नतीजा तब मिला जब AC बंद और खिड़कियां बंद थीं, पर तेज गर्मी में यह तरीका practical नहीं है।
CarDekho ने यह भी साफ कहा कि तेज तापमान में बिना AC के चलाने से ड्राइवर की attentiveness घट सकती है। इसलिए सेफ्टी को माइलेज से ऊपर रखें।
कब खिड़की खोलें और कब AC चलाएं?
fueleconomy.gov की सलाह भी यही है: कम speed पर खिड़कियां खोलें, हाईवे speed पर AC चलाएं। crossover point हर कार के shape और खिड़की के साइज़ पर निर्भर करता है, पर एक व्यावहारिक rule of thumb यह है:
- 50-60 km/h से नीचे (सिटी): मौसम सुहावना है तो खिड़की खोलना सस्ता पड़ता है।
- 60-80 km/h: दोनों का असर लगभग बराबर, आराम के हिसाब से चुनें।
- 80 km/h से ऊपर (हाईवे): AC ऑन और खिड़कियां बंद रखना ज्यादा सस्ता और शांत है।
- 40°C+ की गर्मी या भारी प्रदूषण: आराम और सेफ्टी के लिए AC ही चलाएं, चाहे speed कुछ भी हो।
Automotive experts की यह सलाह खासकर हैचबैक और sedan पर लागू होती है। ऊंची, बॉक्सी SUV में खुली खिड़कियों से drag का नुकसान आमतौर पर और जल्दी महसूस होता है।
Petrol vs Diesel vs CNG vs EV: किस गाड़ी में AC से सबसे ज्यादा माइलेज गिरता है?
प्रतिशत के हिसाब से सबसे ज्यादा असर आमतौर पर छोटे पेट्रोल इंजन, CNG कारों और EV की range पर दिखता है। सबसे कम असर बड़े डीजल इंजन में। नीचे के ranges अनुमान हैं और कार, तापमान व ट्रैफिक के साथ बदलते हैं।
| Fuel Type | सिटी में AC का असर (अनुमान) | असर का कारण | Practical नोट |
|---|---|---|---|
| Petrol (800-1200cc) | 15% – 25% | छोटा इंजन, कम power, compressor का हिस्सा बड़ा | सबसे ज्यादा महसूस होता है, खासकर stop-go ट्रैफिक में |
| Petrol (1.5L+ / Turbo) | 10% – 18% | ज्यादा torque, load का relative share छोटा | Turbo इंजन में low RPM पर भी pickup बना रहता है |
| Diesel | 8% – 15% | ज्यादा torque और बड़ा displacement | बेस माइलेज ज्यादा है, पर ज्यादा गर्मी में लीटर का फर्क फिर भी दिखेगा |
| CNG | 12% – 20% | कई CNG कारों में CNG mode पर power थोड़ी कम होती है | AC और CNG साथ में चढ़ाई पर pickup कम कर सकते हैं |
| EV (Electric) | Range पर असर, प्रतिशत में और बड़ा हो सकता है | AC compressor सीधे battery से चलता है | चार्जिंग के दौरान cabin को pre-cool करें |
EV के बारे में अमेरिकी DOE की गाइडलाइन भी यही कहती है कि hybrid, plug-in और battery-electric वाहनों में AC का असर प्रतिशत के आधार पर और भी बड़ा हो सकता है। EV में इंजन नहीं होता, इसलिए यहां “माइलेज” की जगह range घटती है।
Petrol: जहां सबसे ज्यादा “चुभता” है
Alto, WagonR या Tiago जैसी छोटी पेट्रोल कारों में कुल power कम होती है। इसलिए AC ऑन होते ही pickup भी हल्का महसूस होता है और माइलेज भी गिरता है।
Diesel: प्रतिशत कम, पर असर जरूर
Diesel इंजन में torque ज्यादा और बेस माइलेज बेहतर होता है। इसीलिए AC का प्रतिशत असर अपेक्षाकृत कम दिखता है। हां, जब डीजल की कीमत ज्यादा हो तो रुपयों में फर्क फिर भी जेब पर लगता है।
CNG: दो मोर्चों पर दबाव
CNG कारों में कई बार CNG mode पर power पेट्रोल मोड से थोड़ी कम मिलती है। ऐसे में AC का load ज्यादा भारी लगता है। यही वजह है कि कई CNG ओनर AC चलाते हुए चढ़ाई पर pickup की शिकायत करते हैं।
कार का AC भी ठंडा रहे और माइलेज भी न गिरे: 7 एक्सपर्ट टिप्स

ज्यादातर लोग यह गलती करते हैं: कार में बैठते ही AC को 16°C और फुल blower पर कर देते हैं। इससे compressor को लंबे समय तक पूरी मेहनत करनी पड़ती है और फ्यूल ज्यादा जलता है। इन 7 आदतों से आप ठंडक भी पाएंगे और फ्यूल भी बचाएंगे।
- Auto Climate Control को 24°C पर सेट करें।
- 24°C ज्यादातर लोगों के लिए आरामदायक रहता है। CarDekho ने अपने AC टेस्ट में भी यही सेटिंग रखी थी।
- सेट-पॉइंट जितना नीचे होगा, compressor उतनी ज्यादा देर चलेगा।
- AC ऑन करने से पहले अंदर की गर्मी निकालें (Venting)।
- धूप में खड़ी कार का cabin बाहर से कई डिग्री ज्यादा गर्म हो जाता है। पहले सभी खिड़कियां खोलकर 30-60 सेकंड गर्म हवा बाहर निकालें।
- फिर खिड़कियां बंद करके AC चलाएं। इससे compressor को शुरुआती ‘पुल-डाउन’ में कम मेहनत करनी पड़ती है।
- ठंडक आने के बाद Recirculation मोड ऑन करें।
- पहले से ठंडी हो चुकी cabin की हवा को दोबारा ठंडा करना बाहर की गर्म हवा खींचने से आसान है।
- हर 15-20 मिनट में कुछ देर Fresh Air मोड रखें, ताकि cabin में बासी हवा और नींद का असर न बढ़े।
- Cabin Air Filter साफ रखें।
- भारत की धूल में यह फिल्टर जल्दी जाम होता है। जाम फिल्टर से हवा का बहाव घटता है, blower ज्यादा मेहनत करता है और ठंडक देर से आती है।
- ओनर्स मैनुअल के हिसाब से इसे साफ या बदलवाएं, आम तौर पर साल में कम से कम एक बार।
- AC की सालाना सर्विसिंग कराएं और Condenser साफ रखवाएं।
- कम refrigerant या गंदा condenser होने पर सिस्टम को वही ठंडक देने के लिए ज्यादा देर चलना पड़ता है।
- सर्विस के समय radiator/condenser fan और belt की हालत भी जांच लें।
- छाया में पार्क करें या Sunshade लगाएं।
- ठंडा शुरू होने वाला cabin AC पर कम लोड डालता है। विंडशील्ड पर reflective sunshade से cabin का तापमान काफी कम रहता है।
- खिड़कियों पर फिल्म लगवानी हो तो केवल कानूनी सीमा के अंदर वाली ही लगवाएं।
- Smooth ड्राइव करें और मंज़िल से 2-3 मिनट पहले AC बंद कर दें।
- सिर्फ blower चलाकर बची हुई ठंडक का फायदा उठाएं, इसमें compressor का load हट जाता है।
- झटके से accelerate करने और बार-बार ब्रेक लगाने से AC का असर और बढ़ जाता है।
(Disclaimer):
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FAQs: कार AC और माइलेज से जुड़े सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या AC का पंखा (Blower) 1 या 4 पर चलाने से माइलेज पर कोई फर्क पड़ता है?
फर्क बहुत मामूली होता है। Blower एक छोटी electric मोटर है, जबकि फ्यूल की असली खपत AC Compressor से होती है। इसलिए माइलेज बचाना है तो पंखे की speed से ज्यादा तापमान सेट-पॉइंट पर ध्यान दें।
2. क्या खड़ी गाड़ी में AC चलाने से इंजन खराब होता है?
थोड़ी देर AC चलाकर खड़े रहने से इंजन खराब नहीं होता, पर यह फ्यूल की बर्बादी जरूर है। बहुत देर तक idle पर चलाने से बचें। सेफ्टी चेतावनी: बंद जगह या बंद शीशों में AC चलाकर कभी न सोएं, क्योंकि exhaust से carbon monoxide cabin में पहुंचने का खतरा रहता है।
3. क्या AC चालू करके कार स्टार्ट करनी चाहिए?
नहीं। पहले इंजन स्टार्ट करें, कुछ सेकंड रुकें और फिर AC ऑन करें। स्टार्ट के समय battery और starter पर पहले से ज्यादा करंट का दबाव होता है, और AC व blower का extra electrical load उसे और बढ़ाता है।
4. Auto AC और Manual AC में कौन सा ज्यादा माइलेज बचाता है?
Auto Climate Control तापमान सेट करने के बाद compressor और blower को खुद संभालता है, इसलिए cabin जरूरत से ज्यादा ठंडा नहीं होता। इससे फ्यूल की थोड़ी बचत संभव है। Manual AC भी उतना ही अच्छा है, बशर्ते आप उसे हमेशा फुल कूलिंग पर न छोड़ें।
अंकुर सक्सेना (Ankur Saxena) CarsInfo.in के संस्थापक और मुख्य ऑटोमोटिव विश्लेषक हैं। वे भारतीय कार खरीदारों और वाहन मालिकों के लिए गाड़ियों के ऑन-ग्राउंड व्यावहारिक अनुभव, रखरखाव ट्रिक्स और समस्याओं के सटीक समाधान साझा करते हैं।